फिल्म इन्दुस्ट्री में फूहड़ और अश्लीलता कोई नै बात नहीं है लकिन अभी जो गाने आ रहे है , उन्होंने तो हद ही पार कर दी है! लोग जहा मुन्नी की बदनामी और शीला की जवानी पर, शब्दों की परवाह कए बिना  बेहिचक नाच रहे थे वही लोग अब गाली बकते हुए भी डांस कर पाएंगे! ये सब सेंसर बोर्ड की आँखों के सामने हो रहा है!
आमिर खान प्रोडकशन और इमरान खान स्टारर फिल्म देल्ही बल्ली को एक फॅमिली एन्टर टेनमेंट करार दिया जा रहा है वही फिल्म का गाना भाग डीके बोस डीके दिविएअथि सब्दोएन्टर टेनमेंट करार दिया जा रहा है वही फिल्म का गाना भाग डीके बोस डीके द्वि अर्थी शब्दों के कारण चर्चा में बन हुआ है ! गाने के दो शब्दों को अगर जोड़ दिया जाये तो एक गाली बनती है!  जिसे लोग अपने परिवार के साथ घर में और पार्टीज में गाते नजर आयेंगे!
हाल ही में रिलीज़ हुई बॉलीवुड फिल्मों में अश्लीलता, फूहर्ता, गे कल्चर  आवारा टाइप कॉलेज कल्चर, स्मोकिंग, ड्रिंकिंग कल्चर, और गालीया बिना किसी किसी एडिटिंग के साथ दिखाया गया है, चाहे वह I am, हो, फालतू हो, या हाल ही में रिलीज़ हुई रागिनी एम् एम् अस हो !

सवाल ये है की क्या हमारे चित्रपटल पर कोई और सब्जेक्ट नहीं बचा है. और सेंसर बोर्ड जिसे हर छोटी जातिवाचक टिपण्णी और द्वि अर्थी संवाद. पर आपति थी आज उसे कोई आपति नहीं है , ये एक अच्छा कदम है की तेटेलीविजन पर कुछ अश्लील डीओद्रेंट के विज्ञापन जल्द ही बंद हो जायेंगे. लकिन बड़ी स्क्रीन पर भी अश्लीलता रोकनी जरूरी है.